ऊर्जा सुरक्षा और किफायती कीमतों के बीच संतुलन साधते हुए भारत ने अमेरिका से साफ कहा है कि उसे गैस तो चाहिए, लेकिन महंगी नहीं। अगर कीमत सही और सस्ती होगी, तभी वह LNG खरीदेगा। पेट्रोनेट एलएनजी के प्रमुख अक्षय कुमार सिंह ने कहा कि भारत अपने लोगों के लिए सस्ती और फायदेमंद ऊर्जा चाहता है। इसलिए अमेरिकी गैस तभी खरीदी जाएगी, जब उसकी कीमत बाकी ईंधनों के मुकाबले ठीक और किफायती होगी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोनेट एलएनजी के CEO अक्षय कुमार सिंह ने कहा कि भारत ऐसी गैस खरीदेगा जो सस्ती हो और लोगों के लिए फायदेमंद हो। उनका कहना था कि अगर गैस की कीमत ठीक रहेगी, तो लोग इसे दूसरे ईंधनों की जगह ज्यादा इस्तेमाल करेंगे। यह बात उन्होंने ऐसे समय पर कही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बातचीत तेज हो रही है।
व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की। इसके बदले अमेरिका ने भारत से अपने आयात को दोगुना से अधिक करने की अपेक्षा जताई है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 132 अरब डॉलर रहा, जिसमें करीब 41 अरब डॉलर का अधिशेष भारत के पक्ष में था। भारत ने पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की मंशा जताई है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह लक्ष्य व्यावसायिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
गैस खपत बढ़ाने की रणनीति
भारत वर्तमान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 15% करना है। फर्टिलाइजर, सिटी गैस, रिफाइनिंग और बिजली सेक्टर में गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। देश में करीब 27,000 मेगावॉट गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता है, लेकिन सस्ती गैस की कमी के कारण प्लांट अपनी क्षमता के एक-चौथाई से भी कम पर चल रहे हैं। ऐसे में सस्ती LNG की उपलब्धता अहम हो जाती है।
लॉन्ग टर्म सौदों की तलाश
पेट्रोनेट, जो कतर और ऑस्ट्रेलिया से गैस आयात करता है, अब लॉन्ग टर्म समझौतों की संभावनाएं तलाश रहा है। कंपनी अपने मौजूदा टर्मिनल की क्षमता बढ़ा रही है और पूर्वी तट पर नया आयात टर्मिनल भी बना रही है।






































